ग्राम स्वराज्य (हिन्दी दैनिक)
संतकबीरनगर। सूचना अधिकारी संतकबीरनगर कार्यालय में लेखाकार पद पर तैनात 38 वर्षीय रत्नेश चौधरी का बीती रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया निवासी रत्नेश चौधरी पुत्र जगदीश चौधरी शनिवार की शाम दोस्त की शादी में शामिल होने बस्ती गए थे। द्वारपूजा के समय दोस्तों के साथ डांस कर रहे थे। इसी दौरान उनके सीने में दर्द उठा और बेचैनी होने लगी। आनन फानन में लोग उन्हें लेकर कैली मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे। मौजूद डाक्टरों ने उनका उपचार शुरू कर दिया। लोगों ने इस बात की सूचना उनके परिजनों को भी दे दिया। परिजन अस्पताल पहुंचे तो वे पूरी तरह होश में थे ओर उन्होंने बताया कि दर्द में अब काफी आराम है। परिजनों के साथ अस्पताल के बेड पर बैठ कर बातचीत कर रहे थे कि इसी बीच उन्होंने अपने छोटे भाई से बेचैनी और चक्कर आने की शिकायत किया।
अभी लोग कुछ समझ पाते कि रत्नेश चौधरी बेड पर गिरकर बेसुध हो गए। लोगों ने दुबारा डाक्टर को बुलाया लेकिन तबतक उनकी मौत हो चुकी थी। अचानक हुई मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन रात में ही उनका शव लेकर घर चले आए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकारों में शोक की लहर दौड़ गई। लोग उनके घर पहुंच कर परिजनों को ढांढस बंधाने में जुटे थे लेकिन परिजनों के करुंण क्रंदन को देख सभी के धैर्य जवाब दे रहे थे। परिजनों को सांत्वना देने के लिए किसी के पास शब्द नहीं थे। परिजनों को सांत्वना देने वालों में सहायक सूचना निदेशक बस्ती प्रभात त्रिपाठी, सूचना अधिकारी संतकबीरनगर सुरेश कुमार सरोज, वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, गोरखनाथ मिश्र, के.के. मिश्र, अमित पांडेय, जितेन्द्र पाठक, उमेश चौधरी समेत तमाम लोग शामिल रहे।
और जब दहाड़ें मारकर रोने लगे सहायक सूचना निदेशक बस्ती -
लेखाकार रत्नेश चौधरी के निधन की सूचना पर पहुंचे सहायक सूचना निदेशक बस्ती प्रभात त्रिपाठी रत्नेश चौधरी का पार्थिव शरीर देखते ही दहाड़ें मार कर रोने लगे। सूचना अधिकारी संतकबीरनगर सुरेश कुमार सरोज से लिपट कर रोते हुए उन्होंने बताया कि ऐसा सहकर्मी मिल पाना असम्भव है। अभी दो दिन पहले ही मेरे पास आकर वैष्णो देवी दर्शन करने के लिए छुट्टी मांगने आया था। क्या पता था कि जिस दिन वैष्णो देवी की यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहा है उसी दिन अंतिम यात्रा पर चला जाएगा। उनके करुंण क्रंदन को देख मौजूद सभी लोग फफक कर रोने लगे।
2018 में पुलिस विभाग पद पर भर्ती हुए थे -
सूचना अधिकारी कार्यालय में लेखाकार रहे रत्नेश चौधरी ने अपने कारोबारी जीवन की शुरुआत जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय में कम्प्यूटर आपरेटर पद से किया था। वर्ष 2018 में वे पुलिस विभाग में दरोगा पद पर भर्ती हो गए। लगातार 8 माह तक पुलिस की ट्रेनिंग भी किया। लेकिन जिला सूचना अधिकारी कार्यालय में लेखाकार पद पर चयनित होने के बाद यह कहकर पुलिस विभाग की नौकरी छोड़ दिया कि जिले में रहकर नौकरी करूंगा तो परिवार की देखभाल करने का भी समय मिलता रहेगा।
परिजनों पर टूटा विपत्ति का पहाड़-
रत्नेश चौधरी दो भाइयों में सबसे बड़े थे। छोटे भाई को इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने के बाद वे उसे किसी अच्छी जगह स्थापित कराने की कोशिश में जुटे थे। माता-पिता, भाई, पत्नी और दो मासूम बच्चों का इकलौता सहारा छिन जाने से परिजनों पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक के 7 वर्षीय एक बेटा और 4 वर्षीया एक बेटी हैं। मासूम बच्चे लोगों को रोते बिलखते देख सहमे हुए थे। उन्हें इस बात का एहसास ही नहीं था कि आफिस से लौट कर उन्हें सीने से लगाकर दुलारने वाले पापा अब कभी वापस नहीं लौटेंगे।
आज सुबह 10 बजे सूचना कार्यालय पर होगी शोकसभा-
जिला सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज ने बताया कि रत्नेश चौधरी के असामयिक निधन से कार्यालय सूना हो गया है। सभी कर्मचारी बेहाल हैं। रत्नेश का हंसता मुस्कुराता चेहरा आंखों से ओझल नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि आज दिन सोमवार की सुबह 10 बजे कार्यालय पर शोकसभा का आयोजन किया गया है। उन्होंने सभी कर्मचारियों और पत्रकार साथियों का आह्वान किया है कि दिवंगत आत्मा की शांति के लिए आयोजित शोकसभा में पहुंच कर अपनी संवेदना ब्यक्त करें।