महराजगंज:-जीवन का दूसरा नाम है संघर्ष, संघर्ष करने वालों को थोड़ी कठिनाइयों का सामना तो करना पड़ता है लेकिन संघर्ष के बाद जो परिणाम मिलता है उसका बात ही कुछ और है। प्राप्त जानकारी के अनुसार धानी गांव की बेटी अंशिका का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ यह जानकर पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। अंशिका के इस चयन पर संघर्ष की बात इसलिए हो रही हैं क्योंकि अंशिका ने अपने 22 वर्ष की उम्र में यह कामयाबी हासिल किया है और वह भी कठिन मेनहत और परिश्रम के बदौलत। आपको बताते चलें कि अंशिका धानी गांव निवासी विश्वविजय तिवारी की पुत्री है। विश्वविजय तिवारी के पास दो पुत्रियां और एक पुत्र है। उनमें अंशिका सबसे बड़ी है। अंशिका की प्राथमिक शिक्षा से इन्टर तक की शिक्षा धानी में स्थित ब्राइट वे एकेडमी में हुआ है। अंशिका शुरुआती दौर से ही मेधावी छात्रा रही है उसने हाईस्कूल में धानी ब्लॉक को टॉप किया था। जबकि इन्टर में प्रथम स्थान प्राप्त किया। पुनः बीटेक में प्रवेश के लिए परीक्षा दिया। जिसके फलस्वरूप डॉ०राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद में प्रवेश मिला वहा से बीटेक किया और बीटेक में भी प्रथम स्थान लाने पर अंशिका को राज्यपाल द्वारा पुरस्कृत किया गया था। पुनः एमटेक करने के लिए प्रवेश परिक्षा दिया जिसपर मदन मोहन इंजीनियरिंग कॉलेज गोरखपुर में जगह मिली और एमटेक में प्रवेश मिला। और वहीं से ही अंशिका का सेलेक्शन पारुल विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति हुई। इस बात की ख़बर लगने पर पिता विश्वविजय तिवारी ने बताया कि आज हमारा तमन्ना पूरा हुआ और हमारा और हमारे बेटी का भी संघर्ष रंग लाया मेरी कि मेरी बेटी अंशिका का चयन असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है। वहीं अंशिका के चयन पर बड़े पिता गोरखनाथ तिवारी जो भाभा परमाणु अनसुंधान केन्द्र इन्दौर में वैज्ञानिक है,माता रेखा रानी, अंजली व बेटा आयुष तिवारी,मौसा सन्तोष पाण्डेय, मामा बबलु तिवारी, पियूष मणि त्रिपाठी, गोपाल सिंह, सन्तोष सिंह, बृजेश सहानी, अरविन्द मणि त्रिपाठी, केशव मणि त्रिपाठी, सुनील मणि त्रिपाठी, पिकलु तिवारी, ओमप्रकाश मणि त्रिपाठी (सेठई बाबा), नीतेश मिश्र, सुनील मणि त्रिपाठी, विष्णु मणि त्रिपाठी सहित क्षेत्र के अन्य लोगों ने बधाई दिया।
संघर्ष ने लाया रंग धानी के अंशिका का असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ चयन, क्षेत्र में खुशी का माहौल
byGS News
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